मतल'अ या मतला या मितला
मतल'अ कहते हैं ग़ज़ल के पहले शेर को, इसके दोनों भाग एक जैसे होते हैं। इसे कभी क्षितिज या उद्गम ( शुरू होने की जगह) के बतौर भी लिखा जाता है। م+ط+ل+ع=مطلعमतला में त (ت) के स्थान पर तोय (ط) का उपयोग होता है। फ़ैज़ कहते हैं -" यही किनार-ए-फ़लक का सियाहतरीं गोशा,यही है मतला -ए-माह-ए-तमाम कहते हैं "
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